राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

उनकी रचनाओं में यदि ग़ुलामी की पीड़ा है,तो क्रांति का उद्घोष भी है। उनमें शांति और निर्माण का संदेश है तो युद्धकाल की राष्ट्रीयता भी है। सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं बँधा हूँ, स्वप्न हूँ, लघु वृत्त हूँ मैं नहीं तो व्योम का विस्तार हूँ मैं ये हैं वीररस के कवि, लेखक, निबंधकार, पद्म विभूषण श्री रामधारी … Continue reading राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर