Bebaak

बेबाक आज की लड़कियों की कहानी है। गांव, कस्बों और शहरों की ये लड़कियां अपने-अपने हिस्से के छोटे-बड़े संघर्ष कर रही हैं। ये संघर्ष बाहर से ज़्यादा इनके अपने अंदर चल रहा है। ये लड़कियां सिर्फ ताज़ी हवा में सांस लेना चाहती हैं, ना दिखने वाले बंधनों को काटना चाहती हैं, इनके अंदर प्रेम के भेष में लिपटी वर्जनाओं से निकलने की बेचैनी है। ये लड़कियां जानती हैं कि वो परफेक्ट नहीं हैं, फिर भी खुद को दूसरा मौका देती हैं, इसीलिए ये लड़कियां बेबाक हैं।

Description

बेबाक आज की लड़कियों की कहानी है। गांव, कस्बों और शहरों की ये लड़कियां अपने-अपने हिस्से के छोटे-बड़े संघर्ष कर रही हैं। ये संघर्ष बाहर से ज़्यादा इनके अपने अंदर चल रहा है। ये लड़कियां सिर्फ ताज़ी हवा में सांस लेना चाहती हैं, ना दिखने वाले बंधनों को काटना चाहती हैं, इनके अंदर प्रेम के भेष में लिपटी वर्जनाओं से निकलने की बेचैनी है। ये लड़कियां जानती हैं कि वो परफेक्ट नहीं हैं, फिर भी खुद को दूसरा मौका देती हैं, इसीलिए ये लड़कियां बेबाक हैं। इन कहानियों में कोई नायिका नहीं है, कोई खलनायक नहीं है, ना दुनिया को बदल डालने वाली कोई क्रांति…सिर्फ ताज़ी हवा में सांस लेने की एक ख्वाहिश है, ना दिखने वाले बंधनों को काटने की छटपटाहट है, प्रेम के भेष में लिपटी वर्जनाओं से निकलने की बेचैनी है। अपने जीवन के साधारणत्व में कुछ असाधारण खोज रही लड़कियों की कहानी है “बेबाक” .

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