चाँद तन्हा है आसमां तन्हा – मीना कुमारी की याद में

‘टुकड़े टुकड़े दिन बीता, धज्जी धज्जी रात मिली जिसका जितना आँचल था उतनी ही सौगात मिली रिमझिम रिमझिम बूंदों में, जहर भी है और अमृत भी आँखें हँस दीं दिल रोया, ये अच्छी बरसात मिली।’ उफ्फ़ लिखने वाले ने क्या लिख डाला है। अगर अभी शायर का नाम समझ न आया हो तो ये पढ़िए – ‘चाँद तन्हा है आसमां तन्हा दिल मिला है कहाँ … Continue reading चाँद तन्हा है आसमां तन्हा – मीना कुमारी की याद में